Wednesday, March 25, 2009

तन्हाई...

हम तो तनहा ही रह गए...


थी एक तमन्ना जीने की,
था एक बहाना मरने का,
ना यादेंरही, ना वादें रहे,
हम तो तनहा ही रह गए...
.
सपने जो थे इन आंखों में,
आंसूं से घुल गए साँसों में,
ना जख्म बचे, ना दर्द रहा,
हम तो तनहा ही रह गए...

जाने कैसे वो अरमान थे,
जाने वो कैसी कशिश थी,
ना राहें मिली, ना मंजिल मिले,
हम तो तनहा ही रह गए...

चाहतें कुछ हम्मे भी थी,
दिल की कुछ ख्वाहिशें भी,
ना दिल रहा, ना धड़कन रही,
हम तो तनहा ही रह गए...

इस पराये मतलबी दुनीया में,
कोई ना अपना बन सका,
हम थे, हम ही रहे,
हम तो तनहा ही रह गए...

-सौरभ साहू

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