मै, मेरी ज़िन्दगी और तुम

ज़िन्दगी के अनजान सफर में,
कोई मंजिल ना थी, कोई कारवां ना था...
कोई सपना नही था इन आंखों में,
कोई साथी नही था, मेरी राहों में,
कोई लगन नही, कोई बैर नही,
कोई अपना नही, कोई गैर नही॥
ना कोई था मेरे आंसुओं को गालों से हटाने वाला,
ना कोई गम में अपने सीने से लगाने वाला।
दिल मेरा भी धक्-धक् करता था,
हाँ; मैं भी किसी पे मरता था,
पर कोई ना मुझको सुनने वाला था,
उस कमरे में नही कोई उजाला था;
जहाँ मैं और मेरी तन्हाई थी,
मुझसे दूर, मेरी ही परछाई थी।
क्या बचा था साँस लेने के सिवा,
आंसुओं को आँखों में पनाह देने के सिवा,
थक जाती थी ज़िन्दगी जहाँ कोने में,
बिक जाती थी हँसी जहाँ रोने में,
उसी अंधेरे कमरे से बाहर, मैं निकला एक दिन, जिंदगी की तलाश में,
सोये हुए दिल और भटकती हुई लाश में।
उसी सफर के एक मोड़ में,
मैंने देखा तुम्हे एक पल,
और दिल में हुई एक हलचल...
मुझे पहली बार लगा ज़िन्दगी कितनी खूबसूरत है,
शायद, शायद मुझे तुम्हारी ही ज़रूरत है।
बिन पूछे ही मेरे, तुमने थामा मुझे,
और ले गई सतरंगी आसमाँ की ओर,
पहली बार मैंने हवा को चूमा,
और मेरे जीवन में हुई नई भोर...
मैंने सुना पंछियों को गाते हुए,
सूरज को बादलों में शर्माते हुए,
फूलों को भी मैंने फीका पाया,
जब देखा तुम्हे मुस्कुराते हुए...
जब बालों को तुमने चेहरे से हटाया,
चाँद को करीब मैंने अपने पाया॥
तुम्हारी पलकें जब जब झुकी,
मैंने ख़ुद को कहीं और पाया,
शायद ये तुम्हारा जादू है, या मेरी तपस्या का फल,
या कोई मीठा सपना, जो तुमको पाऊं मैं हर पल॥
जब धीमे कदमो से तुम यूँ चुपके चुपके आती हो,
हौले हौले जाने कब दिल में उतर जाती हो,
दस्तक सी होती है कहीं,
जब तुम आंखों से कुछ बोल जाती हो,
जाने कब मेरे जख्मों पे तुम, चुपके से मरहम लगाती हो।
पर जब भी तुम आती हो, साँसे थम सी जाती हैं,
धड़कने तेज़ होने लगती हैं,
और जुबाँ सिल जाती है॥
शायद कभी मैं ना कह पाऊं,
पर दिल ने लिखी तुझे एक पाती है...
"तू कौन है, कोई अप्सरा तो नही,
जो दिल को वश में कर जाती है...
तू कौन है, कोई परी तो नही,
जो हँसा के फ़िर छोड़ जाती है...
तू कौन है, कोई रानी तो नही,
जो प्रेमी को गुलाम बनाती है...
पर जो भी है, मेरे दिल की मल्लिका,
मेरे मन को एक तू ही भाती है,
सिर्फ़ तू ही मेरी जीवनसाथी है,
तेरे लिए ही अब मेरी साँसे,
तू ही बस मेरा जीवन,
तेरी हर खुशी, अब मेरा दामन,
तुझपे लूटा दूँ मेरा तन मन धन ।"
बस इतना है अब तुमसे कहना... तुम हो मेरा अनमोल गहना...
मेरे अंधेरों में पहली किरण, मेरे घने जंगल की हिरन...
मेरे भटके राहों की दिशा, मेरा भविष्य मेरी तृषा...
अब तुमसे ही मेरी हर दास्तान है,
तू मेरी जमीं और मेरा आसमान है।
बस डरता हूँ मैं, उन अंधेरों से,
कभी वापस मुझे वहां छोड़ ना देना,
साथ जाने वाली इन राहों को,
मुझसे अलग कहीं मोड़ ना देना,
मर जाऊँगा अब की जो दुबारा मैं तनहा हुआ,
तू मेरा रब है, तुझसे है मांगी मैंने बस एक दुआ,
ये जनम जनम का साथ है, हम निभाएंगे जन्मो जनम॥
हर पल में एक नया जीवन है, तू जो मेरे संग है सनम॥
-
हम हमेशा साथ हैं,
"मैं, मेरी ज़िन्दगी और तुम"
-
सौरभ साहू
...To be continued...

ज़िन्दगी के अनजान सफर में,
कोई मंजिल ना थी, कोई कारवां ना था...
कोई सपना नही था इन आंखों में,
कोई साथी नही था, मेरी राहों में,
कोई लगन नही, कोई बैर नही,
कोई अपना नही, कोई गैर नही॥
ना कोई था मेरे आंसुओं को गालों से हटाने वाला,
ना कोई गम में अपने सीने से लगाने वाला।
दिल मेरा भी धक्-धक् करता था,
हाँ; मैं भी किसी पे मरता था,
पर कोई ना मुझको सुनने वाला था,
उस कमरे में नही कोई उजाला था;
जहाँ मैं और मेरी तन्हाई थी,
मुझसे दूर, मेरी ही परछाई थी।
क्या बचा था साँस लेने के सिवा,
आंसुओं को आँखों में पनाह देने के सिवा,
थक जाती थी ज़िन्दगी जहाँ कोने में,
बिक जाती थी हँसी जहाँ रोने में,
उसी अंधेरे कमरे से बाहर, मैं निकला एक दिन, जिंदगी की तलाश में,
सोये हुए दिल और भटकती हुई लाश में।
उसी सफर के एक मोड़ में,
मैंने देखा तुम्हे एक पल,
और दिल में हुई एक हलचल...
मुझे पहली बार लगा ज़िन्दगी कितनी खूबसूरत है,
शायद, शायद मुझे तुम्हारी ही ज़रूरत है।
बिन पूछे ही मेरे, तुमने थामा मुझे,
और ले गई सतरंगी आसमाँ की ओर,
पहली बार मैंने हवा को चूमा,
और मेरे जीवन में हुई नई भोर...
मैंने सुना पंछियों को गाते हुए,
सूरज को बादलों में शर्माते हुए,
फूलों को भी मैंने फीका पाया,
जब देखा तुम्हे मुस्कुराते हुए...
जब बालों को तुमने चेहरे से हटाया,
चाँद को करीब मैंने अपने पाया॥
तुम्हारी पलकें जब जब झुकी,
मैंने ख़ुद को कहीं और पाया,
शायद ये तुम्हारा जादू है, या मेरी तपस्या का फल,
या कोई मीठा सपना, जो तुमको पाऊं मैं हर पल॥
जब धीमे कदमो से तुम यूँ चुपके चुपके आती हो,
हौले हौले जाने कब दिल में उतर जाती हो,
दस्तक सी होती है कहीं,
जब तुम आंखों से कुछ बोल जाती हो,
जाने कब मेरे जख्मों पे तुम, चुपके से मरहम लगाती हो।
पर जब भी तुम आती हो, साँसे थम सी जाती हैं,
धड़कने तेज़ होने लगती हैं,
और जुबाँ सिल जाती है॥
शायद कभी मैं ना कह पाऊं,
पर दिल ने लिखी तुझे एक पाती है...
"तू कौन है, कोई अप्सरा तो नही,
जो दिल को वश में कर जाती है...
तू कौन है, कोई परी तो नही,
जो हँसा के फ़िर छोड़ जाती है...
तू कौन है, कोई रानी तो नही,
जो प्रेमी को गुलाम बनाती है...
पर जो भी है, मेरे दिल की मल्लिका,
मेरे मन को एक तू ही भाती है,
सिर्फ़ तू ही मेरी जीवनसाथी है,
तेरे लिए ही अब मेरी साँसे,
तू ही बस मेरा जीवन,
तेरी हर खुशी, अब मेरा दामन,
तुझपे लूटा दूँ मेरा तन मन धन ।"
बस इतना है अब तुमसे कहना... तुम हो मेरा अनमोल गहना...
मेरे अंधेरों में पहली किरण, मेरे घने जंगल की हिरन...
मेरे भटके राहों की दिशा, मेरा भविष्य मेरी तृषा...
अब तुमसे ही मेरी हर दास्तान है,
तू मेरी जमीं और मेरा आसमान है।
बस डरता हूँ मैं, उन अंधेरों से,
कभी वापस मुझे वहां छोड़ ना देना,
साथ जाने वाली इन राहों को,
मुझसे अलग कहीं मोड़ ना देना,
मर जाऊँगा अब की जो दुबारा मैं तनहा हुआ,
तू मेरा रब है, तुझसे है मांगी मैंने बस एक दुआ,
ये जनम जनम का साथ है, हम निभाएंगे जन्मो जनम॥
हर पल में एक नया जीवन है, तू जो मेरे संग है सनम॥
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हम हमेशा साथ हैं,
"मैं, मेरी ज़िन्दगी और तुम"
-
सौरभ साहू
...To be continued...
ज़िन्दगी के अनजान सफर में,
ReplyDeleteकोई मंजिल ना थी, कोई कारवां ना था...
कोई सपना नही था इन आंखों में,
कोई साथी नही था, मेरी राहों में,
कोई लगन नही, कोई बैर नही,
कोई अपना नही, कोई गैर नही॥
बहुत खूब। नन्द कुमार उन्मन की पंक्तियाँ याद आयीं-
अपने सारे खोये मैंने सपने तुम न खोना।
होना जो था हुआ आजतक बाकी अब क्या होना?
सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com
ज़िंदगी को एक खूबसूरत अहसास बनाने वाले इन पलों को सलाम।
ReplyDeleteलेआउट की अत्यन्त कलात्मक प्रस्तुति के साथ..
ReplyDeleteबेहतर भावाव्यक्ति...
बहुत खुब दिल को छु गयी आप की ये कविता
ReplyDeleteकविता के साथ 'शविता' नहीं 'सविता' को जोड़िए। मंत्र की शक्ति आ जाएगी।
ReplyDeleteढेर सारी
शुभकामनाएँ ।
ReplyDeleteword verification हटा दें। भक्तों को कष्ट होता है।
http://kavita-vihangam.blogspot.com
nice blog
ReplyDeleteबोध की अवस्था में जिन्दगी बोझ के बजाय शिक्षालय बन जाती हैं। हर कहीं से ज्ञान का अंकुरण होता है। जो बोध में जीता है, वह सुख के क्षणों का सदुपयोग करता हैं। उसे दु:ख के क्षणों का भी महŸवपूर्ण उपयोग करना आता हैं। सुख के क्षणों को वह योग बना लेता है तो दु:ख के क्षण उसके लिए तप बन जाते है। प्रत्येक अवस्था में उसे जीवन की सार्थकता की समझ होती है।
ReplyDeleteवाह............जिंदगी कितनी खूबसूरत है.............सच में जब वो सामने आ जाएँ तो हर शै खूबसूरत हो जाती है.............लाजवाब लिखा है.बधाई
ReplyDeleteबहुत खूब अच्छा लिखा है
ReplyDeleteBehad khoobsoorat...aapke samne kamnayen falti rahen, in shubhechhayon sahit
ReplyDeleteshama
mujhe bahut acchi lagi aap or aapki tanhai likhte rehye.
ReplyDeleteउसी सफर के एक मोड़ में,
ReplyDeleteमैंने देखा तुम्हे एक पल,
और दिल में हुई एक हलचल...
मुझे पहली बार लगा ज़िन्दगी कितनी खूबसूरत है,
शायद, शायद मुझे तुम्हारी ही ज़रूरत है।
बहुत खूब वाह भई वाह..अति सुंदर ..,अभिनंदन .. मक्
क़यामत है कि सुन लैला का दस्ते-कैस में आना
तअज्जुब से वो बोला , यूँ भी होता है ज़माने में. गा़लिब
sachmuch zindagi khubsurat hee hai. narayan narayan
ReplyDeleteumda !
ReplyDeletenamaskar mitr,
ReplyDeleteaapki saari posts padhi , aapki kavitao me jo bhaav abhivyakt hote hai ..wo bahut gahre hote hai .. aapko dil se badhai ..
is kavita ne to dil me ek ahsaas ko janam de diya hai ..
dhanyawad.....
meri nayi kavita " tera chale jaana " aapke pyaar aur aashirwad ki raah dekh rahi hai .. aapse nivedan hai ki padhkar mera hausala badhayen..
http://poemsofvijay.blogspot.com/2009/05/blog-post_18.html
aapka
Vijay
sabhi shrotaaon kaa main tahe Dil se swagat karta hoon :)
ReplyDeletemain apni sabhi best rachnayein aap tak pahunchata rahunga..
sadhanyawad.
-Saurabh
U R POEM IS MIND BLOWING
ReplyDeleteGR8 WORK
IT REMINDS ME OF MY LOVE
इस सुन्दर रचना के लिए बहुत -बहुत आभार
ReplyDeleteनव वर्ष की हार्दिक शुभ कामनाएं
बस डरता हूँ मैं, उन अंधेरों से,
ReplyDeleteकभी वापस मुझे वहां छोड़ ना देना,
साथ जाने वाली इन राहों को,
मुझसे अलग कहीं मोड़ ना देना,
मर जाऊँगा अब की जो दुबारा मैं तनहा हुआ,
तू मेरा रब है, तुझसे है मांगी मैंने बस एक दुआ,
im speechless!! very b'ful poem.